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मुसलमान सरकार से संवाद खत्म ना होने दें, लेकिन ज़ुल्म के खिलाफ अपने अधिकारों का प्रयोग करें: बॉबी नक़वी संपादक गल्फ न्यूज़

गल्फ न्यूज के संपादक बॉबी नक़वी ने वतन समाचार से विशेष बातचीत में भारत के मुसलमानों को मशवरा दिया है कि वह सरकार की नीयत पर शक करने के बजाय सरकार के साथ बराबर संवाद जारी रखें। उन्होंने कहा कि अगर आपके साथ अत्याचार होता है या जुल्म होता है तो सिस्टम मौजूद है सिस्टम में अपनी आवाज़ उठाएं और अपना विरोध दर्ज कराएं, लेकिन सरकार के साथ संवाद बनाए रखें। सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास एक तरफ से नहीं हो सकता। दोनों तरफ से होना चाहिए।

By: मोहम्मद अहमद
  • मुसलमान सरकार से संवाद खत्म ना होने दें, लेकिन ज़ुल्म के खिलाफ अपने अधिकारों का प्रयोग करें: बॉबी नक़वी संपादक गल्फ न्यूज़  

 


 गल्फ न्यूज के संपादक बॉबी नक़वी ने वतन समाचार से विशेष बातचीत में भारत के मुसलमानों को मशवरा दिया है कि वह सरकार की नीयत पर शक करने के बजाय सरकार के साथ बराबर संवाद जारी रखें। उन्होंने कहा कि अगर आपके साथ अत्याचार होता है या जुल्म होता है तो सिस्टम मौजूद है सिस्टम में अपनी आवाज़ उठाएं और अपना विरोध दर्ज कराएं, लेकिन सरकार के साथ संवाद बनाए रखें। सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास एक तरफ से नहीं हो सकता। दोनों तरफ से होना चाहिए।

 

 



उन्होंने लिंचिंग की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लिंचिंग की घटनाएं निंदनीय हैं। इससे दुनिया में देश की छवि अच्छी नहीं होती है। उन्होंने गोदी मीडिया की खबरों पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि हमें यह भी सोचना होगा कि हमारा समाज कैसा है कि वह इन लोगों को बर्दाश्त कर रहा है जो इनके लिए उल्टी-सीधी खबरें परोसते हैं और समाज में नफरत फैलाने का काम करते हैं। उन्होंने मीडिया कर्मियों को मशवरा दिया कि सरकारें आती-जाती रहेंगी लेकिन समाज में जो ज़हर है वह बना रह जाएगा और उसके बहुत दूरगामी परिणाम होंगे।

 

 



इससे देश को काफी नुकसान होगा। उन्होंने मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के मामले पर बातचीत करते हुए कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ मदरसे के लोगों को तनख्वाह नहीं मिल रही है। यूपी में बहुत सारे ऐसे शिक्षक हैं जो रोज धरने पर रहते हैं। सरकार के साथ उनका झगड़ा मुसलसल चलता रहता है, लेकिन सैलरी मिलनी चाहिए और इसके लिए आवाज मुसलसल उठाना ही इसका हल है।

 

 



उन्होंने खाड़ी के देशों में भारत की छवि पर बात करते हुए कहा कि जब भारत में अच्छा होता है तो छवि यहां अच्छी होती है लेकिन जब लिंचिंग यह हाथरस जैसी घटनाएं होती हैं तो उससे छवि खराब भी होती है। क्योंकि यहां 200 देशों के लोग रहते हैं और जब अखबार में खबर छपती है तो जो खबर छपती है उसी के हिसाब से लोगों का नजरिया बनता है।

 

 




उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकार का काम कंट्री की इमेज बनाना या बिगाड़ना नहीं है बल्कि पत्रकार का काम यह है कि वह जो खबर जैसी भी हो जो घटना स्पॉट पर हुई हो उसको वैसे रिपोर्ट कर दे। उन्होंने कहा कि अखबार में एक ओपिनियन का कॉलम होता है उसमें आप अपनी ओपिनियन दे सकते हैं लेकिन पत्रकार को PR से बचकर घटनाओं को सही ढंग से रिपोर्ट करना चाहिए।

 

 


उन्होंने अमेरिकी मीडिया की प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस तरह से वाशिंगटन पोस्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झूठ को छापा और नई यॉर्क टाइम्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जो कि एक बिजनेसमैन हैं उनके टैक्स को लेकर खबर की वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि हमें वहां की मीडिया से सीखना चाहिए। उन्होंने खाड़ी के देशों में मीडिया की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए कहा कि खाड़ी में मीडिया की भूमिका एक सीमित है, लेकिन लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बिल्कुल अलग है। वहां मीडिया का काम सरकारों से सवाल करना और मुसलसल सवाल करना है। 

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