उर्दू भाषा के लिए मातम नहीं काम करने की जरूरत है: प्रोफेसर अब्दुल हक़

By: Ahmad Mohammad

नयी दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय उर्दू दिवस के अवसर पर ग़ालिब अकादमी बस्ती हजरत निजामुद्दीन में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए प्रोग्राम के कर्ताधर्ता हकीम सैयद अहमद खान ने इस बात का दावा किया कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का यह कहना था कि उर्दू पर पाकिस्तान का दावा गलत है. उर्दू भारत की जुबान है और उर्दू मेरी माद्री (मां की) जुबान है. डॉक्टर सैयद अहमद में सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उर्दू दिवस का आयोजन इस बात का शुभ संकेत है कि उर्दू पढ़ने वालों की गिनती बढ़ती जा रही है.


 इस अवसर पर प्रोफेसर अब्दुल हक ने कहा कि उर्दू के लिए मातम करने की गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा कि उर्दू वालों की जिम्मेदारी है कि वह उर्दू को बढ़ाने के लिए आगे आएं. उन्होंने कहा कि जिंदा क़ौमें कभी मातम नहीं करती हैं. प्रोफेसर अब्दुल हक ने इस बात पर जोर देकर कहा कि उर्दू का भविष्य बेहतर है और उर्दू पढ़ने वालों की तादाद में भी बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने इसके लिए कई मिसाल भी पेश की.


 प्रोफेसर अब्दुल हक ने कहा कि आज एक मौलवी को JRF में ₹35000 की स्कॉलरशिप और प्रोफेसर बनने के बाद डेढ़ लाख की सैलरी उर्दू और मकतब की देन है. उन्होंने कहा कि हमें मकतब पर काम करना होगा.
 दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और दिल्ली विधानसभा के पूर्व सदस्य चौधरी मतीन अहमद ने कहा कि उर्दू के लिए स्कूलों की जरूरत नहीं है. हम अपने घर में भी उर्दू पढ़ सकते हैं. चौधरी मतीन ने कहा कि मुझे अफसोस है कि मैं उर्दू नहीं पढ़ सका, लेकिन खुशी इस बात की है कि उर्दू पढ़ने वालों की तादाद बढ़ी है. उन्होंने कहा कि दिल्ली की दूसरी सरकारी भाषा उर्दू है. हम खुश तो हो सकते हैं लेकिन अपने हिस्से का काम हमें करना होगा.


 अबुल कलाम आजाद इस्लामिक अवेकनिंग सेंटर के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद रहमान सनाबिली मदनी ने इस बात पर जोर देकर कहा कि आज मदरसों से उर्दू का सब्जेक्ट के तौर पर गायब होना यह अफसोसनाक और चिंता जनक है. उन्होंने कहा कि आज उर्दू वालों की उर्दू इतनी कमजोर है कि कई बार मातम करने के दिल कहता है और गुस्सा भी आता है. उन्होंने कहा कि हम उर्दू को बचा सकते हैं अगर बचाना चाहें और यह जिम्मेदारी हमें खुद अदा करनी होगी. 


मोहम्मद जाहिद आजाद झंडा नगरी वरिष्ठ मुस्लिम स्कॉलर सलाहुद्दीन मक़बूल समेत कई लोगों ने प्रोग्राम को संबोधित किया, जबकि इस अवसर पर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत के अध्यक्ष नावेद हामिद भी मौजूद थे. प्रोग्राम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सुहैल  अंजुम ने किया जबकि राष्ट्रीय सहारा उर्दू के एडिटर नफीस आबिदी दैनिक सियासी तकदीर के न्यूज़ एडिटर जावेद क़मर समेत कई लोगों को अवार्ड से सम्मानित किया गया.


 ज्ञात रहे कि पिछले 20 वर्षों से उर्दू डेवलपमेंट नाम कि संस्था देशभर में उर्दू दिवस का आयोजन करती है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाया जाता है.

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