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खबरदार: क्या हम “राइट टू रेप” के दिन का इंतेज़ार कर रहे हैं?

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सरकार को चाहिए कि फ़ौरन इस दिशा में बयान बाज़ी से ऊपर उठ कर कठोर क़दम उठाए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो पार्लियामेंट स्ट्रीट पर एक लाख महिलाओं को लेकर उन की इज्ज़त की हिफाज़त के लिए हम धरना देने के लिए मजबूर होंगे.

समाज में महिलाओं के साथ बढती नफरत और समाज में आ रही गिरावट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी नेता और समाजसेवी वसीम गाज़ी ने कहा है कि यह एक सभ्य समाज के माथे पर कलंक है, जो समाज में अपने फन को तेज़ी से फैला रहा है और इस को कुचलना वक़्त की सब से बड़ी जरूरत है.

वसीम गाज़ी ने कहा कि समाज में महिलाओं के तईं बढ़ रही नफ़रत ना सिर्फ निंदनीय है, बल्कि उसको अगर नहीं रोका गया तो यह ज़हर पूरे समाज को अपनी चपेट में ले लेगा और वह दिन दूर नहीं जब लोग राइट टू रेप (right to rape) रेप के अधिकार की डिमांड शुरू कर देंगे. उन्हों ने कहा कि औरत औरत होती है और उसका औरत होना ही उस का धर्म होता है.

इसलिए समाज में बढ़ती गुंडागर्दी और बदमाशी पर लगाम लगाने और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए मेरी सरकार से विनती है कि वह सिविल सर्विसेज में 50% सीटें अगले 10 साल के लिए महिलाओं के लिए आरक्षित कर दे. उन्होंने कहा कि अगर हमने ऐसा नहीं किया तो समाज का ताना-बाना बिखर जाएगा और समाज में पूरी तरह अराजकता फैल जाएगी.

उन्हों ने कहा कि अगर महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को नहीं रोका गया तो मैं एक लाख महिलाओं को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पर धरना दूंगा और फिर इस को प्रदेश जिला और ब्लॉक स्तर तक ले जाऊंगा, क्योंकि महिलाओं की सुरक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी है.

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