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कविगुरु रबीन्द्रनाथ टागोर की कविता ट्वीट कर अब्दुल ख़ालिक़ ने दी आज़ादी की बधाई

लोजपा कि प्रधान महासचिव अब्दुल ख़ालिक़ ने 15 अगस्त 2019 को कविगुरु रबीन्द्रनाथ टागोर द्वारा भगवान से प्रार्थना के रूप में लिखी गयी कविता को ट्वीट किया है और देश वासियों को आज़ादी की बधाई दी ही.

By: मोहम्मद अहमद
फाइल फोटो

 

लोजपा के प्रधान महासचिव अब्दुल ख़ालिक़ ने 15 अगस्त 2019 को कविगुरु रबीन्द्रनाथ टागोर द्वारा भगवान से प्रार्थना के रूप में लिखी गयी कविता को ट्वीट किया है और देश वासियों को आज़ादी की बधाई दी ही.

 

"जहां  मन है निर्भय और मस्तक है ऊंचा

 

जहां ज्ञान है मुक्त

 

जहां पृथ्वी विभाजित नहीं हुई है छोटे छोटे खंडों में

 

संकीर्ण स्वदेशी मानसिकता के  दीवारों में

 

जहाँ शब्द सब निकलते हैं सत्य की गभीरता से

 

जहाँ अविश्रांत प्रयास उसका हाथ  बढ़ा रहा है परिपूर्णता के ओर

 

जहां स्पष्ट  न्याय का झरना खोया  नहीं है अपना रास्ता

 

निर्जन मरुभूमि के मृत्यु  जैसा नकारात्मक रेत के अभ्यास में

 

जहाँ मनको नेतृत्व दे रहे हो तुम

 

ले जा रहे हो निरंतर विस्तारित विचार  और गति के  मार्ग को

 

ले जा रहे हो वही स्वतन्त्रता की स्वर्ग को , हे मेरे पिता , मेरे देश को जागृत होने दो"

 

प्रिय बंधु ,

 

यह कविता कविगुरु रबीन्द्रनाथ टागोर द्वारा भगवान को प्रार्थना के रूप में लिखा गया है। उनके कविता संकलन गीतांजलि का यह एक अमूल्य कविता है । इस कविता में कविगुरु रबीन्द्रनाथ टागोर पराधीनता के बंधन से मुक्ति पाने के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं  । वे ब्रिटिश शासकों के भारतियों के प्रति खराब  व्यवहार से  व्यथित  होकर सर्वमुक्तिदाता भगवान   को प्रार्थना करते हुए समस्त देशवासियों  को  जाग्रत होने के लिए आह्वान  किए हैं । उस समय की मांग को देखते हुए उनके द्वारा उत्सर्गीकृत  यह कविता  बहुत ही प्रभावी और प्रेरणादायी है ।

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