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पवित्र रमज़ान महीने के आखिरी दिनों में क्या करें ? ईद की नमाज़ कैसे पढें ?

1. पवित्र रमज़ान के महीने में सबसे महत्वपूर्ण काम फित्राह अदा करना है। यह हैसियत वाले तमाम मुसलमानों पर अपनी तरफ से और घर के तमाम सदस्यों की तरफ से अदा करना अनिवार्य है। रमज़ान के आखि़री दिनों में उसे ज़रूर अदा करना चाहिए। इसकी मात्रा खजूर, किशमिश, पनीर और जौ हो तो साढ़े तीन किलो और गेहूं हो तो पौने दो किलो दिया जाएगा। इसकी क़ीमत भी निकाली जा सकती है। पौने दो किलो गेहूं की कीमत लगभग 40 रुपये है। सामर्थ्यवान इसमें इज़ाफा कर सकते हैं।

By: वतन समाचार डेस्क
  • पवित्र रमज़ान महीने के आखिरी दिनों में क्या करें ? ईद की नमाज़ कैसे पढें ?

 

नई दिल्ली, 18.05.2020। कोरोना वायरस से निमटने के लिए सरकारी सतह पर मार्च के अंत में लॉकडाउन का जो एलान किया गया था और धार्मिक स्थलों पर जमा होने की जो पाबंदी लगायी गयी थी, उसका सिलसिला लंबा होता गया। इसके नतीजे में पवित्र रमज़ान महीने में भी पांचों समय का नमाज़, उसी तरह जुमा और तरावीह की नमाज़ें सीमित रहीं और मुसलमान घरों पर ही व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर उन्हें अदा करते रहे। संभावना है कि यह सिलसिला अभी कुछ और दिन जारी रहेगा। इसलिए सवाल किया जा रहा है कि इस सूरतहाल में रमज़ान महीने के आख़िरी दिनों की दिनचर्या कैसी हों? और नमाज़ें कैसे अदा की जाएं ? जमाअत इस्लामी हिन्द की शरिया काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी और काउंसिल के सचिव डॉक्टर रज़ीउल इस्लाम नदवी के पर्यवेक्षण में एक बैठक आयोजित हुई। बैठक में निम्नलिखित फैसले किए गएः

 

1.            पवित्र रमज़ान के महीने में सबसे महत्वपूर्ण काम फित्राह अदा करना है। यह हैसियत वाले तमाम मुसलमानों पर अपनी तरफ से और घर के तमाम सदस्यों की तरफ से अदा करना अनिवार्य है। रमज़ान के आखि़री दिनों में उसे ज़रूर अदा करना चाहिए। इसकी मात्रा खजूर, किशमिश, पनीर और जौ हो तो साढ़े तीन किलो और गेहूं हो तो पौने दो किलो दिया जाएगा। इसकी क़ीमत भी निकाली जा सकती है। पौने दो किलो गेहूं की कीमत लगभग 40 रुपये है। सामर्थ्यवान इसमें इज़ाफा कर सकते हैं।

2.            रमज़ान महीने के आखि़री दस दिनों की विषम रातों में से किसी एक रात में सबे क़द्र हो सकता है इसलिए उनमें अधिक से अधिक इबादत (कुरआन पाठ, अतिरिक्त नमाज़ दुआ आदि) करने की व्यवस्था की जाए।

3.            रमज़ान महीने का आखिरी जुमा (जुम-अतुल-विदा) दूसरे जुमा की तरह है। इसका कोई विशेष महत्व नहीं है। मौजूदा हालात में घरों में अगर चार लोग हों तो वह जमाअत के साथ जुमा की नमाज़  या दोपहर की नमाज़ पढ़ सकते हैं। कोई व्यक्ति एकेला हो तो वह व्यक्तिगत रूप से दोपहर की नमाज़ पढ़ ले।

4.            मौजूदा हालात में ईदुल फित्र की नमाज़ ईदगाहों, जामा मस्जिद और मोहल्ले की मस्जिदों (जितने लोगों की इजाज़त हो) अदा की जाए। घरों में अगर चार लोग हों तो वह ईद की नमाज़ दो रिकाअत अतिरिक्त तकबीरों के साथ जमाअत के साथ पढ़ें। नमाज़ के बाद खुत्बा दिया जा सकता है, लेकिन ज़रूरी नहीं। चार लोग न हों तो चार रिकाअत नफ़िल नमाज़ पढ़ ली जाए।

5.            रमज़ान के आखिरी दिनों में खरीदारी के लिए बाज़ारों में भीड़ लगाने से यथासंभव बचें। ईद के दिन नए या पुराने साफ कपड़े पहने जाएं और अल्लाह का शुक्र अदा किया जाए।

6.            ईद के दिन घूमने-फिरने और मुलाक़ात और मुबारकबाद के लिए ज़्यादा इधर उधर जाने से बचा जाए। ईद की खुशिओं में ग़रीबों का खासतौर पर मुस्लिम कैदियों का जेलों में और उनके परेशान हाल घरवालों का ख्याल रखा जाए।

7.            दुआ की जाए कि अल्लाह ता’ला कोरोना की जानलेवा बीमारी से जल्द से जल्द निजात दे और सामान्य जीवन वापस लौट आए।

जमाअत इस्लामी हिन्द की शरीया काउंसिल सरकार और प्रशासन से मांग करती है कि चैथे लॉकडाउन में इबादतगाहों को पाबंदी से अलग किया जाए और उनमें सामाजिक दूरी बरक़रार रखते हुए सामान्य की तरह इबादत करने की इजाज़त दी जाए।

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