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रेवड़ी अपनी फैमिली और यादव समुदाय को बाँट रहे हैं लालू

विधानमंडल में माॅं बेटे का विपक्ष का नेता होना और मुख्य सचेतक के तौर पर सिर्फ यादव समुदाय का चुना जाना मुसलमानों के साथ खुली गद्दारी: कासमी

By: Watan Samachar Desk
Mufti Ajaz Arshad Qasmi during a press conference in Patna

 

पटना, 23मई: मुत्तहिदा मिल्ली मजीलस के अध्यक्ष और मुस्लिम स्काॅलर मुफ्ती एजाज अरशद कासमी ने पटना सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में मीडिया से बात चीत करते हुए कहा कि बिहार में पिछले विधान सभा चुनाव में मुसलमानों ने RJD को एकतरफा मतदान किया, जिसके बदौलत लालू प्रसाद यादव के कुनबे को राज्य की बागडोर संभालने का अवसर मिला, लेकिन हद यह होगई कि मुसलमानों को हर जगह पीछे डाला गया और अपने दोनों बेटों को सभी अहम मंत्रालय दे दिये गये। उसके बाद कुछ बचा वह यादव समुदाय को मिला।

 

 

 मुसलमानों को हर जगह ठगा गया। 2016 में राज्य सभा की दो सीट RJD को मिली एक सीट बेटी मीसा भारती और दूसरी सीट पर भाजपा के रहनुमा रामजेठ मलानी को बैठाया गया। मुसलमान सिर्फ तमाशा देखते रहे। क़ासमी ने आरोप लगाया कि जब भ्रष्टाचार की दलदल में फंसने की बजह से तेजस्वी यादव के हाथ से कुर्सी चली गयी तो वह विपक्ष के नेता खुद बन गये और मुख्य सचेतक के तौर पर यादव समुदाय के ललित यादव को चुना गया।

 

 अब्दुल-बारी सिद्धीकी जैसे कई सिनीयर लीडर पार्टी में मौजूद थे जिन की अनदेखी की गई। इसी तरह विधान परिशद में लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को नेता विरोधी दल बना दिया और मुख्य सचेतक के तौर पर यादव समुदाय से वफादारी करते हुये सुबोध यादव को चुना गया। वहाॅं भी कमरे आलम जैसे सिनीयर लीडर मजबूत दावेदार थे।

 

उन्हों ने कहा कि यह मुसलमानों के साथ खुली गद्दारी व धोखेबाजी है जिसे किसी भी तौर पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार के मुसलमानों ने हमेशा लालू प्रसाद यादव के साथ जजबाती रिशता रखा और हर तरह के उम्मीदवार को शत प्रतिषत वोट दिया जिसके बदले में इस पार्टी ने मुसलमानो को धोखा व फरेब के सिवा कुछ नहीं दिया।

 

सत्ता में हिस्सेदारी की बात आयी तो लालू यादव ने पहले परिवार फिर यादव समुदाय को जगह दी और मुसलमानों को राजनीतिक हिस्सेदारी से दूर रखा। जिसकी बजह से मुस्लिम नेताओं को राजद में हमेशा राजनीतिक रूप से वंचित होना पड़ा जो कि बिहार की सियासत के लिये दुर्भाग्यपूर्ण है और अब लालू प्रसाद को इस के बुरे परिणाम भुगतने होगें।

 

उन्होंने कहा कि अब बिहार के मुसलमान राजनीतिक तौर पर जागरूक हो चुके हैं। उन्हें और अब नहीं ठगा जा सकता है। अब मुसलमान यह फैसला कर रहे हैं कि वह सत्ता में हिस्सेदारी की बुनियाद पर किसी भी पार्टी को वोट करेगें। सिर्फ एक खास पार्टी का भय दिखाकर वोट नहीं लिया जा सकता। मुसलमान भय की राजनीति से ऊपर उठ चुके हैं और वह किसी तरह के बहकावे में आने वाले नहीं है।

 

 मुसलमानों के सामने सारे विकल्प खुले हुये हैं। लालू यादव को यह गलतफहमी हो रही है कि उन्हें वोट करना मुसलमानों की मजबुरी है जबकि ऐसा नहीं है, मुसलमान बिलकुल मजबूर नहीं हैं। उन्हें अपना अगल सियासी रास्ता चुनने से कोई रोक नहीं सकता।

 

PRESS RELEASE BY MUFTI AJAZ ARSHAD QASMI (+91-9910215431)


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