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मज़दूरों को लेकर प्रियंका गांधी वाद्रा का संदेश

प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि नमस्कार! मैं आप सबसे कुछ बातें करना चाह रही थी। देखिए, काफी समय से हम देख रहे हैं कि हमारे प्रवासी भाई-बहन भीषण परिस्थितियों में, कड़ी धूप में बगैर खाए पिए, पैदल अपने गांव की ओर चल रहे हैं। ये लोग देशभर से आ रहे हैं, कोई गुजरात से आ रहा है। कल मैंने एक वीडियो देखा, एक लड़का जम्मू-कश्मीर से चलकर सहारनपुर तक आ गया है, और उसको आगे बिहार तक जाना है। इसी तरह से आप सबने देखा कि कई बहनें गर्भवती हैं, गर्भवती होते हुए 6 घंटे- 8 घंटे कड़ी धूप में चल रही हैं। कुछ लोग अपने बच्चों को गोद में लेकर जा रहे हैं। कुछ टूटी हुई साइकिलों पर जा रहे हैं। एक और वीडियो मैंने देखा कि एक दादी-दादा अपने पोती-पोतों को उठाकर, इस तरह से दादा जी उनको उठाकर, एक झूला सा बनाया था और उसमें उनको रखकर उठाकर चल रहे थे।

By: वतन समाचार डेस्क

प्रियंका गांधी वाद्रा ने कहा कि नमस्कार! मैं आप सबसे कुछ बातें करना चाह रही थी। देखिए, काफी समय से हम देख रहे हैं कि हमारे प्रवासी भाई-बहन भीषण परिस्थितियों में, कड़ी धूप में बगैर खाए पिए, पैदल अपने गांव की ओर चल रहे हैं। ये लोग देशभर से आ रहे हैं, कोई गुजरात से आ रहा है। कल मैंने एक वीडियो देखा, एक लड़का जम्मू-कश्मीर से चलकर सहारनपुर तक आ गया है, और उसको आगे बिहार तक जाना है। इसी तरह से आप सबने देखा कि कई बहनें गर्भवती हैं, गर्भवती होते हुए 6 घंटे- 8 घंटे कड़ी धूप में चल रही हैं। कुछ लोग अपने बच्चों को गोद में लेकर जा रहे हैं। कुछ टूटी हुई साइकिलों पर जा रहे हैं। एक और वीडियो मैंने देखा कि एक दादी-दादा अपने पोती-पोतों को उठाकर, इस तरह से दादा जी उनको उठाकर, एक झूला सा बनाया था और उसमें उनको रखकर उठाकर चल रहे थे।

 

अब हम सबको अपनी जिम्मेदारी समझनी पड़ेगी। ये सिर्फ भारत के लोग नहीं है, ये भारत के वो लोग हैं, जो भारत की रीढ़ की हड्डी हैं। जिन्होंने ये इमारतें बनाई हैं, जिनमें हम रह रहे हैं। जिनके खून और पसीने से ये देश चलता है, हम सबकी जिम्मेदारी है इनके प्रति, मेरी है, आपकी है, सरकार की है, हर राजनीतिक दल की है, इसलिए मैं समझती हूँ कि ये राजनीति करने का समय नहीं है। बहुत ही स्पष्ट हूँ कि हर राजनीतिक दल अपने राजनीतिक परहेजों को दूर करते हुए, सकारात्मक भाव से, सेवा भाव से, लोगों की मदद में शामिल हो। तो उत्तर प्रदेश की जो कांग्रेस पार्टी है, इसी भावना को लेकर जैसे ही लॉकडाउन की अनाउंसमेंट हुई, उसके अगले दिन हमने हर जिले में वॉलंटियर ग्रुप बनाए, जिसको हमने ‘कांग्रेस के सिपाही’ का नाम दिया। इन वॉलंटियर ग्रुप्स के जरिए हमने हेल्पलाइन जारी की। हर जिले में और दिन-रात हम खाना, राशन बांटने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा हमने सांझी रसोईयाँ खोली। उसके अलावा हमने हाईवे के टास्क फोर्स बनवाए, जो हाईवे पर, जो चल रहे हैं उनकी मदद के लिए है। तो तमाम ऐसे कार्य हमारे बड़े से बड़े लीडर और हमारे ग्रामीण स्तर के कार्यकर्ता, हमारे जिला स्तर के कार्यकर्ता, अपने ही साधनों से ये काम दिन-रात कर रहे हैं और इस काम के जरिए हमने अब तक 67 लाख लोगों की मदद की है। उसमें से 60 लाख के करीब उत्तर प्रदेश में है और 7 लाख लोग ऐसे हैं, जो उत्तर प्रदेश के बाहर फंसे हुए थे, जिनको खाना-राशन की जरुरत थी और जिनका वापस आने के लिए हम कॉर्डिनेशन कर रहे हैं। हमारी एक सेन्ट्रल हेल्पलाइन भी है, उसके जरिए भी हम लगातार दिन-रात कॉर्डिनेशन करते हैं।

 

तो हम मदद करना चाह रहे हैं। हमारी भावना शुरु से सकारात्मक रही है और सेवा का भाव रहा है। इसी भाव से हमने अपने सुझाव मुख्यमंत्री जी को दिए और सकारात्मक रुप से ही दिए, कि देखिए आपको ठीक लगे तो आप ये चीजें कर लीजिए। जहाँ- जहाँ हमें लगा कि वो कुछ अच्छा कर रहे हैं, हमने उनकी तारीफ भी की, हमने उन कदमों का स्वागत भी किया।

 

कुछ समय से हम कह रहे थे कि उत्तर प्रदेश रोडवेज की जो बसें हैं, उनको प्रवासी भाई-बहनों के लिए उपलब्ध करा दीजिए ताकि उनको, जो-जो पैदल चल रहे हैं, वो बसों में बैठकर सुरक्षित तरह से अपने घर-गांव पहुंच पाएँ। तो हम काफी समय से ये सुझाव दे रहे थे, ये मांग कर रहे थे। जब एक दिन कई हादसे हुए, कई एक्सिडेंट हुए और हमने देखा कि उत्तर प्रदेश रोड़वेज की जो बसें है, वो अभी भी सक्रिय नहीं हुई, तो हमने मुख्यमंत्री जी को एक चिट्ठी लिखी कि हम एक हजार बसों को उपलब्ध कराएंगे, गाजियाबाद और नोएडा बॉर्डर पर हम इन बसों को रोक देंगे और आप अगर अनुमति देंगे इनके संचालन के लिए तो जो प्रवासी भाई –बहन दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र से चल रहे हैं, उनको हम इन बसों में बैठाकर उनके घर तक पहुँचा देंगे। 

 

तो अगले दिन मुख्यमंत्री जी ने ये ऐलान किया कि यूपी रोड़वेज की 12 हजार बसें हैं, इन्हीं का इस्तेमाल होगा और आपकी बसों की जरुरत नहीं है, तो हमने 17 तारीख को सुबह 500 बसें गाजियाबाद में खड़ी कीं थी, हमने उनको वापस भेज दिया। अगले दिन उनसे एक और चिट्ठी मिली कि आप अपनी लिस्ट दे दीजिए और हजार बसों की आप लिस्ट दे दीजिए, उसमें चालक का नाम होना चाहिए, परिचालक का नाम होना चाहिए, फिटनेस सर्टिफिकेट बगैरह सब कुछ होना चाहिए, ये सब हमको पहुंचा दीजिए। तो हमने उनको धन्यवाद दिया कि आपने हमको अनुमति दी है, बसों को चलाने के लिए, आपको हम लिस्ट उपलब्ध कर देंगे, तो 4-5 घंटो बाद हमने वो लिस्ट उपलब्ध कर दी। फिर साढ़े ग्यारह बजे, रात को उनसे एक और चिट्ठी मिली की आप अपनी हजार बसें लखनऊ पहुँचा दीजिए कल सुबह 10 बजे, तो इसमें हमने कहा कि देखिए, हमारी बसें खाली दिल्ली से लखनऊ जाएंगी, इन बसों का मकसद ही ये था कि गाजियाबाद और नोएडा से, एनसीआर क्षेत्र से, जो चलकर जा रहे हैं, उनको हम बैठाकर उत्तर प्रदेश के गांव-जिलों में ले जाएं, तो इन बसों का लखनऊ तक खाली चलना, तो पूरे मकसद को ही खत्म कर देता है।

 

तो हमने उनको ये सुझाव दिया कि देखिए, हम गाजियाबाद-नोएडा में इन बसों को तैयार रखेंगे, आप परमिट दे दीजिएगा। फिर ये पूरा राजनीतिक सिलसिला शुरु हुआ कि आप हमें लिस्ट दे रहे हैं, लिस्ट में कुछ गलत नाम हैं। जो भी है, मैं इन चीजों में नहीं पड़ना चाहती और मैं सरकार पर सवाल भी नहीं उठाना चाहती। अगर उस लिस्ट में कुछ ऐसे नंबर हैं, जो गलत हैं, कोई बात नहीं, हम एक नई लिस्ट भी उनको दे सकते हैं। 

मैं सिर्फ ये कहना चाहती हूँ कि 17 तारीख को 500 बसें हमने गाजियाबाद बॉर्डर पर खड़ी की थी। अगर वो 500 बसें चलीं होती, तो कम से कम 20 हजार लोग घर सही सलामत पहुँच जाते। कल हमने 900 बसें, 500 बसें से अधिक बसें राजस्थान-यूपी के बॉर्डर पर और 300 से अधिक बसें गाजियाबाद - दिल्ली बॉर्डर पर उपलब्ध कराई, जिनकी पूरी टोटल संख्या 900 के करीब थी। अब अगर ये बसें चली होतीं, तो कल 36 हजार और आज 36 हजार लोग अपने घर के लिए सही सलामत, सुरक्षा पूर्ण रवाना हो जाते। लेकिन हम इस राजनीतिक सिलसिले में उलझे रहे। उन्होंने कहा कि लिस्ट गलत है, कुछ ये हो रहा है, वो हो रहा है। बसें हमारी पहुँच गई हैं, कल 4 बजे से हमारी बसें बॉर्डर पर खड़ी थीं, उनको आगे परमिट, यूपी में जहाँ पर उन्होंने कहा था कि यहाँ पर हमें गाजियाबाद और नोएडा में, दो पॉइंट्स दिए थे, यहाँ तक पहुंचाइए, वहाँ जाने का परमिट ही नहीं दे रहे हैं, यूपी के आगे, तो बसें खड़ी रहीं, आज भी खड़ी हैं।

 

मैं सिर्फ ये कहना चाहती हूँ कि देखिए, 4 बजे, 24 घंटे हो जाएंगे कि ये बसें उपलब्ध हैं। अगर आपको इस्तेमाल करनी है, तो इस्तेमाल करिए, हमें अनुमति दीजिए। आपको भाजपा के झंडे लगाने हैं उन पर, अपने भाजपा के स्टीकर लगाने हैं, तो बेशक लगाइए-बेशक लगाइए। आपको अगर कहना है कि आपने उपलब्ध कराई हैं, तब भी कराइए, लेकिन इन बसों को चलने दीजिए, क्योंकि जब तक हम इस राजनीतिक उलझन में पड़े रहे हैं, जब तक आप अजीब-अजीब से बयान दे रहे हैं और तमाम मुद्दे उठा रहे हैं, तब तक हम कम से कम 92 हज़ार लोगों को घर पहुँचा सकते थे और वही 92 हज़ार लोग आज धूप में चल रहे हैं, तमाम मुसीबतों को झेलते हुए चल रहे हैं।

 

तो मैं सिर्फ मुख्यमंत्री जी से ये आग्रह करना चाहती हूँ, हमारी बसें वहाँ पर 4 बजे तक खड़ी हैं, आपको इस्तेमाल करनी हैं, तो आप हमें परमिट दीजिए, अनुमति दीजिए कि हम उनका संचालन कर सकें। अगर आपको नहीं इस्तेमाल करनी हैं, तो भी कोई बात नहीं, हम उनको वापस भेज देंगे। हमने तीन दिन पहले भी वापस भेज दिया था 500 बसों को, हम वापस भेज देंगे। जिस तरह से हम लोगों की मदद कर रहे हैं। जिस तरह से हमारे लोग हर जिले में, हर शहर में, हमारे कार्यकर्ता प्रवासी भाई-बहनों के और लॉकडाउन और महामारी से जो पीड़ित लोग हैं, उनकी मदद कर रहे हैं, उस तरह से हम करते रहेंगे। हमें कोई परवाह नहीं है कि आपकी बसें हैं या हमारी बसें हैं। हम सिर्फ एक सेवा भाव से मदद करना चाहते हैं। 

तो मैं कहना चाहती हूँ, खासतौर से अपने प्रवासी भाई-बहनों से, जो इस संकट में हैं और जो पैदल चलकर जा रहे हैं कि कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता, एक-एक नेता आपके साथ है। आप उत्तर प्रदेश के जिस जिले से, जिस शहर से गुजरेंगे, हमारे लोग आपको मिलेंगे, आपको खाना उपलब्ध करेंगे, आपके लिए पानी उपलब्ध करेंगे, आपको कोई भी सुविधा की जरुरत हो, वो उपलब्ध करेंगे। हमारी जो क्षमता है, उससे हम पूरी तरह से आपको मदद करने की कोशिश करेंगे और हम आपके साथ इस संकट में खड़े हैं।

 

धन्यवाद।

 

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