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मुसलमानों को यह रवैया बदलना होगा अन्यथा ज़ुल्म और इतिहास

By: वतन समाचार डेस्क

  सवाल यह है कि आखिर मुसलमान कांग्रेस सरकार में होने वाली घटनाओं पर खामोश क्यों रहते हैं, जबकि बीजेपी सरकार में होने वाली किसी भी घटना को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जाता है. मुसलमानों को यह तरीका बदलना होगा. लोकतंत्र में जुर्म किसी पर भी हो और किसी भी तरह का हो सरकार किसी की भी हो खुल कर के मुखर होकर के आवाज उठानी होगी. तभी लोकतंत्र में सरकारें वोट की अहमियत को समझें गी. अगर किसी पार्टी ने आपको अपना बधुआ मजदूर समझ लिया तो फिर आपके साथ जो होगा उस कि कल्पना भी नहीं कर सकते.

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नयी दिल्ली: गौ हत्या के नाम पर मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के जरिये तीन मुस्लिम युवकों पर लगाए गए एनएसए के बाद सियासत गर्म हो गई है. बसपा चीफ मायावती ने कहा है कि कांग्रेस की एमपी सरकार ने पूर्वर्ती बीजेपी की तरह गौ हत्या के शक में मुसलमानों पर रासुका के तहत बर्बर कार्रवाई की है. उन्होंने एएमयू के 14 छात्रों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने की भी कड़े शब्दों में निंदा की है.

 

मायावती ने माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के जरिए ट्वीट करते हुए लिखा है "कांग्रेस की MP सरकार ने पूर्ववर्ती बीजेपी की तरह गोहत्या के शक में मुसलमानों पर रासुका के तहत् बर्बर कार्रवाई की। अब UP बीजेपी सरकार ने AMU के 14 छात्रों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया। दोनों सरकारी आतंक है व अति-निन्दनीय। लोग फैसला करे कि दोनों सरकारों में क्या अन्तर है?"

 

 दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी ऐ एमयू के 14 छात्रों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने भी माइक्रोब्लॉगिंग  साइट के जरिए ट्वीट करते हुए लिखा"AMU के 14 छात्रों पर राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज कर दिया गया, कभी JNU कभी AMU देश का माहौल बिगाड़ कर क्या हासिल करना चाहते हैं योगी बाबा? सीमा पर जवान मर रहे हैं और आप देश के अंदर नफ़रत का व्यापार करने में जुटे हैं".

 

 

 अहम सवाल यह है कि बीते दिनों कांग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक कन्वेक्शन में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में मुस्लिम युवकों पर लगाए गए राजद्रोह के मामले की मीटिंग में उपस्थित मुस्लिम नेताओं ने कड़े शब्दों में निंदा की थी. कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं महाराष्ट्र के आरिफ नसीम खान और कर्नाटक के एमएलए रोशन बेग ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा था कि जब कांग्रेस सरकारों में मुसलमानों पर राजद्रोह का मुकदमा लगेगा तो फिर किस मुंह से हम वोट उनसे मांगने जाएंगे.

 

उन्होंने कहा था कि गाय का सम्मान होना चाहिए, लेकिन गाय के नाम पर इंसानों की जान लेने वालों का सम्मान समझ से बहार है. उन्हों ने यह भी कहा था कि जो लोग गाय के नाम पर मासूम इंसानों की हत्या करते हैं उन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.  

 

 लेकिन अहम सवाल यह है कि मुसलमान इन दोनों घटनाओं को अलग अलग तरीके से देख रहे हैं. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के राज्य में गौ हत्या के शक में मुसलमानों पर NSA लगा दिया गया, लेकिन इस पूरे मामले में मुसलमान पूरी तरह से खामोश रहे या आवाज भी उठी तो आधी अधूरी, लेकिन अब जबकि एएमयू के 14 छात्रों पर राजद्रोह का मुकदमा लगाया गया है ऐसे में मुसलमान पूरी तरह से आग बबूला हो चुके हैं और दिल्ली से लेकर लखनऊ तक और अलीगढ़ तक धरने प्रदर्शन की तैयारियां हो रही हैं और धरने प्रदर्शन शुरू भी हो चुके हैं.

 

  सवाल यह है कि आखिर मुसलमान कांग्रेस सरकार में होने वाली घटनाओं पर खामोश क्यों रहते हैं, जबकि बीजेपी सरकार में होने वाली किसी भी घटना को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जाता है. मुसलमानों को यह तरीका बदलना होगा. लोकतंत्र में जुर्म किसी पर भी हो और किसी भी तरह का हो सरकार किसी की भी हो खुल कर के मुखर होकर के आवाज उठानी होगी. तभी लोकतंत्र में सरकारें वोट की अहमियत को समझें गी. अगर किसी पार्टी ने आपको अपना बधुआ मजदूर समझ लिया तो फिर आपके साथ जो होगा उस कि कल्पना भी नहीं कर सकते.

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