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करतारपुर साहिब के दर्शन का मार्ग प्रशस्त करने में मोदी …: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने कहा कि सिख समाज का पूरा इतिहास शौर्य और बलिदान की एक बेमिसाल गौरवगाथा है। यह भारत की मिट्टी और संस्कृति की देन है। गुरबानी भारत की अंतरात्मा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कामना की कि गुरुओं की यह अमर वाणी हम सभी का मार्गदर्शन करती रहे।

By: वतन समाचार डेस्क

नई दिल्ली, 05 नवम्बर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पाकिस्तान के करतारपुर में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन का मार्ग प्रशस्त करने में मोदी सरकार की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि भारत सरकार ने गुरु नानक की तपोस्थली करतारपुर साहिब तक गुरु के प्या‍रों के लिए गलियारा तैयार करने का काम बहुत तेजी से पूरा किया।

राष्ट्रपति कोविंद मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के समापन समारोह के अवसर पर भाई वीर सिंह साहित्य सदन द्वारा आयोजित गुरबानी गायन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज से केवल चार दिन बाद, यह गलियारा दर्शन करने वालों के लिए खोल दिया जाएगा। कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह सहित सिख समुदाय के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

गुरुद्वारा दरबार साहिब के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है कि गुरु नानक देव ने एक साथ बैठकर, मिल-बांटकर भोजन करने की शुरुआत ‘करतारपुर साहिब’ में की थी। आज भी सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोग, एक साथ बैठ कर लंगर छकते हैं।    

कोविंद ने कहा कि गुरु नानक देव हम सभी के दिलों में रहते हैं। वे हमारी सांझी धरोहर हैं। वे पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाने वाली विभूति हैं। उन्होंने सत्य, करुणा, दया, मानवता और प्रेम के आधार पर एक ऐसा समाज बनाने के प्रयास किए जिसमें सभी समान हों। उन्होंने कहा कि गुरु नानक महिलाओं को समाज में समान अधिकार देने की शिक्षा देते थे। उन्होंने महिलाओं को समान अवसर दिए जाने की वकालत करते हुए कहा कि सभी बेटियों व महिलाओं को मुक्त भाव से आगे बढ़ने के अवसर मिलने ही चाहिए। साथ ही उनकी तरक्की और कामयाबी की सराहना होनी चाहिए। उन्होंने मानवता के कल्याण के लिए चारों दिशाओं में यात्राएं कीं। अपनी यात्राओं के दौरान वे कामरूप, श्रीलंका, कश्मीर तथा मक्का-मदीना-बगदाद जैसे स्थानों पर भी गए।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिख समाज का पूरा इतिहास शौर्य और बलिदान की एक बेमिसाल गौरवगाथा है। यह भारत की मिट्टी और संस्कृति की देन है। गुरबानी भारत की अंतरात्मा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कामना की कि गुरुओं की यह अमर वाणी हम सभी का मार्गदर्शन करती रहे। 

 

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