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LIVE UPDATE SHAHEEN BAGH: सुप्रीम कोर्ट ने धरना खत्म करने को लेकर कही बड़ी बात

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 2 महीने से भी लंबे समय से जारी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ धरने को खत्म करने को लेकर कोई फैसला नहीं दिया. आज सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई. आज की सुनवाई इस मायने में काफी महत्वपूर्ण थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकारों ने अपनी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी थी, जिसमें पुलिस पर सवाल खड़े होने की खबरें आ रही थीं.

By: वतन समाचार डेस्क

LIVE UPDATE SHAHEEN BAGH: सुप्रीम कोर्ट ने धरना खत्म करने को लेकर कही बड़ी बात

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 2 महीने से भी लंबे समय से जारी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ धरने को खत्म करने को लेकर कोई फैसला नहीं दिया. आज सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई. आज की सुनवाई इस मायने में काफी महत्वपूर्ण थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकारों ने अपनी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंप दी थी, जिसमें पुलिस पर सवाल खड़े होने की खबरें आ रही थीं. ज्ञात रहे कि आज की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने धरना खत्म करने को लेकर कुछ भी नहीं कहा. कोर्ट ने कहा कि आज यह डायरेक्शन देने का सही समय नहीं है, कि कुछ कहा जाए और किसी तरह का कोई दिशा निर्देश दिया जाए.

 

 

"Supreme Court 
Road blocked at Shaheen Bagh
—————————-
Court said this is not a right moment to pass any directions.. 
Adjourned to 23.03.2020
Intervention application disposed of 
as the court said ......
we don't want to enlarge the ................scope of present petitions."
Adv M. Anwar 
9811997861

अदालत ने कहा, ‘पुलिस अपना काम करे, कभी-कभी ऐसा होता है जब Out of the box जाकर काम करना चाहिए.’ सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को भी संदेश दिया. SC ने कहा कि राजनीतिक दल, हितधारकों को शहर में शांति बनाए रखने की अपील करनी चाहिए. हिंसा का तरीका समाज में बहस का तरीका नहीं है, स्वस्थ बहस होनी चाहिए लेकिन हिंसा नहीं होनी चाहिए.

 अदालत ने कहा कि प्रशासन को परिस्थिति देखते हुए अपना काम करना चाहिए, पुलिस-अथॉरिटी को अपना काम करना चाहिए.

   जस्टिस केएम. जोसेफ इस दौरान बोले कि जब भड़काऊ टिप्पणी की गई, तभी एक्शन लेना चाहिए था. ये बात दिल्ली ही नहीं हर मामले में लागू होती है. पुलिस को सिर्फ कानून के अनुसार काम करना चाहिए. जस्टिस जोसेफ बोले कि पुलिस के प्रोफेशनलिज्म में कमी है.  शाहीन बाग के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘सड़कें प्रदर्शन करने के लिए नहीं होती हैं’.

    अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अभी पुलिस का मनोबल कम नहीं किया जा सकता है, एक पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत हुई है.

    अदालत ने इस दौरान कहा, ‘अभी वातावरण ठीक नहीं है, इस मामले में विचार नहीं किया जा सकता है. अब इस मामले में 23 मार्च को सुनवाई होगी.'

गौरतलब है कि 15 दिसंबर 2019 से दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में विरोध प्रदर्शन चल रहा है. ये प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ है. इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली से नोएडा जाने वाला रास्ता बंद हो गया है.

 

 इधर आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में फैसला देने का उचित समय नहीं है. कोर्ट ने आज की सुनवाई को अगले 23 मार्च तक के लिए टाल दिया है. कोर्ट ने उन याचिकाओं को भी ख़ारिज कर दिया है जिस में और लोगों ने पार्टी बनने कि बात कही थी. कोर्ट ने हस्तक्षेप आवेदन का निस्तारण कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि हम वर्तमान याचिकाओं के दायरे को बढ़ाना नहीं चाहते हैं।

इस से पहले सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग पर सुनवाई 26 फरवरी तक के लिए टाल दी थी। प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटने के लिए समझाने भेजे गए वार्ताकारों संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट सौंपी थी। जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि हम रिपोर्ट देख कर आगे की सुनवाई करेंगे।

 

पिछले 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और वकील साधना रामचंद्रन को रास्ता रोक पर बैठे लोगों से बात करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि वे लोगों को वैकल्पिक जगह पर विरोध करने के लिए समझाएं। कोर्ट ने कहा था कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है लेकिन इसकी एक सीमा है। कोर्ट ने कहा था कि हमारी चिंता सीमित है। आज अगर एक वर्ग ऐसा कर रहा है तो कल दूसरा वर्ग दूसरे मसले पर ऐसा ही करेगा। हर व्यक्ति रोड पर आ जाएगा।

 

कोर्ट ने कहा था कि अगर हमारी पहल असफल होती है तो हम इसे स्थानीय प्रशासन पर छोड़ देंगे। हम उम्मीद करते हैं कि प्रदर्शनकारी बातों को समझेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सुझाव दिया था कि चाहें तो वे भी प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह का ऑफर दे सकते हैं। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ये मैसेज नहीं जाना चाहिए कि पुलिस प्रदर्शनकारियों के समक्ष घुटनों के बल खड़ी है। तब जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा था कि तब इस मामले के पहले ही आपको कोई कदम उठा लेना चाहिए था। तुषार मेहता ने कहा था कि शाहीन बार में महिलाओं और बच्चों को ढाल बनाया गया है। हम उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पूरे शहर को बंधक बना लिया गया है।

 

पिछले 10 फरवरी को इस मामले पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विरोध का अधिकार है लेकिन जगह ऐसी हो जहां दूसरों को परेशानी न हो। इस तरह अनिश्चित काल तक सार्वजनिक सड़क को ब्लॉक कर देना उचित नहीं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

 

बीते दस फरवरी को सुनवाई के दौरान शाहीन बाग के तीन महिलाओं ने भी खुद का पक्ष को रखने की मांग की थी। इन महिलाओं की ओर से कहा गया कि उनके बच्चे को स्कूल में पाकिस्तानी कहा जाता है। तब चीफ जस्टिस एस ए बोब्डे ने कहा था कि किसी बच्चे को स्कूल में पाकिस्तानी कहा गया ये कोर्ट के समक्ष विषय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा था कि क्या चार महीने का बच्चा प्रदर्शन करने गया था। चीफ जस्टिस ने कहा था कि हम इस समय नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) या किसी बच्चे को पाकिस्तानी कहा गया, इस बाबत सुनवाई नहीं कर रहे हैं।

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