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जानिए हिन्दू पक्ष और मसुलिम पक्ष की दलील और फिर कोर्ट का आदेश क्यों और कैसे?

खुदाई में मिले कसौटी पत्थर के खंबों में देवी देवताओं, हिंदू धार्मिक प्रतीकों की नक्काशी. 1885 में फैजाबाद के तत्कालीन जिला जज ने अपने फैसले में माना था कि 1528 में इस जगह हिंदू धर्मस्थल को तोड़कर निर्माण किया गया. लेकिन चूंकि अब इस घटना को साढ़े तीन सौ साल से ज्यादा हो चुके हैं लिहाजा अब इसमें कोई बदलाव करने से कानून व्यवस्था की समस्या हो सकती है.

By: वतन समाचार डेस्क
फाइल फोटो
  • राम की ऐतिहासिकता और अयोध्या में उनके जन्म को लेकर कोई विवाद नहीं लेकिन मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे ही जन्मस्थान होने की हिंदू पक्षकारों की दलील सरासर आधारहीन.
  • हिंदू धर्मग्रंथ भी अवधपुरी में रामजन्म की तस्दीक करते हैं लेकिन सही जगह का पता किसी को भी नहीं.
  • बाबर ने 1528 में जहां मस्जिद बनाई वो खाली जगह थी, मंदिर तोड़ कर बनाए जाने की दलील हवाई.
  • मालिकाना हक के दस्तावेजी प्रमाण मुगल काल से, जब जागीरें और गांव मस्जिद के रखरखाव के लिए दिए गए.
  • एएसआई की ओर से कराई गई खुदाई में मिली दीवार मंदिर की नहीं बल्कि ईदगाह की हो सकती है.
  • खुदाई में जो मूर्तियां मिलीं वो खिलौना भी हो सकते हैं.
  • कसौटी पत्थर के खंबों पर जो आकृतियां मिलीं वो स्पष्ट नहीं हैं. वो खंभे कहां से आये या लाए गये इस पर भी इतिहास में काफी मतभेद हैं, लिहाजा उनसे कहीं सिद्ध नहीं होता कि वहां हिंदू मंदिर ही था.
  • विवादित ढांचे के मुख्य गुंबद के नीचे 22-23 दिसंबर 1949 की रात रामलला के स्वयं प्रकट होने की थ्योरी मनगढ़ंत.
  • उस गुरुवार और शुक्रवार की रात निर्मोही अखाड़े के साधु जबरन विवादित स्थल यानी मस्जिद में घुसे और मूर्तियां रख दीं.
  • मालिकाना हक शुरू से मुसलमानों के पास था. हिंदुओं को सिर्फ रामचबूतरे पर पूजा करने की अनुमति थी.

 

Hindu Party

भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ.

राम देश के सांस्कृतिक पुरुष.

राम की जन्मभूमि उसी जगह जहां मस्जिद का मुख्य गुंबद है.

विष्णु हरि, जिनके सातवें अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम हैं उनका प्राचीन मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई.

मंदिर में पूजा और त्योहार पौराणिक काल से चल रहे हैं. इनकी तस्दीक फाहयान और उसके बाद आये विदेशी सैलानियों की डायरी और आलेखों से होती है.

पद्म पुराण और स्कंद पुराण में भी रामजन्मस्थान का सटीक ब्यौरा.

इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि 1528 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर तोड़कर जबरन मस्जिद बनाई.

एएसआई यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई की रिपोर्ट में भी विवादित ढांचे के नीचे टीले में विशाल मंदिर के प्रमाण मिले.

खुदाई में मिले कसौटी पत्थर के खंबों में देवी देवताओं, हिंदू धार्मिक प्रतीकों की नक्काशी.

1885 में फैजाबाद के तत्कालीन जिला जज ने अपने फैसले में माना था कि 1528 में इस जगह हिंदू धर्मस्थल को तोड़कर निर्माण किया गया. लेकिन चूंकि अब इस घटना को साढ़े तीन सौ साल से ज्यादा हो चुके हैं लिहाजा अब इसमें कोई बदलाव करने से कानून व्यवस्था की समस्या हो सकती है.

 

Court Judgment

* विवादित ज़मीन पर रामलला विराजमान का हक़

* मस्जिद के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन

* मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए केंद्र

* शि‍या वक़्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के दावे खारिज

* सभी 5 जजों ने सर्वसम्मति से लिया फैसला

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