डूबते हुए को नहीं बचा सका यूरोप, तो रोने लगी महिला

In fact, we are insensitive Europe, humanity is alive in other countries?

Watan Samachar Desk

asif khan (contact number-91-98999 89290)

कल जोधपुर में तूरजी के झालरा (जलाशय) मे एक लड़का तैरने के लिए कूद गया, लेकिन वह डूबने लग गया, उसे डूबते देख वहां लोग इकट्ठे हो गये और भीड़ हो इकट्ठी गई, और वह लड़का देखते ही देखते डूब गया, तभी वहां पर विदेशी पर्यटक एक जर्मन महिला वहां पहुंची, हालांकि वह वहां खड़े लोगों की भाषा समझ नहीं पायी, लेकिन इशारों से अंदाज लगा लिया कि कोई पानी में डूब गया है.

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 उसी समय उस महिला ने कपड़े उतारे और झालरे में कूद गई, उसे कूदता देख एक कोरिया से आया पर्यटक भी पानी में उतर गया, हालांकि काफी मशक्कत करने के बाद भी डूबे हुए युवक को बचा नहीं पाये, तो वह जर्मन महिला रोने लग गयी, और कोरियन युवक भी रुआंसा हो गया.

 
मैं इन दोनों विदेशी पर्यटकों को सेल्यूट करता हूं, कि विदेशी धरती पर अपनी जान जोखिम में डालकर एक अंजान युवक को बचाने का प्रयास किया, जबकि हमारे यहां की भीड़ में से एक भी व्यक्ति काबिल नहीं था कि वह प्रयास कर सके.


हमारी भीड़ किसी अकेले निहत्थे व्यक्ति को पीट पीट कर मार तो सकती है, और भीड़ में सबसे कमजोर व्यक्ति भी वीरता दिखाने लगता है.


लेकिन 
भीड़ मरते हुए को बचा नहीं सकती !!

 ~सन्दीप डागर
निक्कमे नेताओं ने निकम्मा भारत बनाया है...


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