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दिल्ली दंगा: बहन की शादी के लिए काज़िम को जमानत मिली

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कानूनी कार्रवाई की वजह से कल भाई अपनी बहन की शादी में शामिल हो सकेगा

By: Press Release
  • दिल्ली दंगा: बहन की शादी के लिए काज़िम को जमानत मिली
  • जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कानूनी कार्रवाई की वजह से कल भाई अपनी बहन की शादी में  शामिल हो सकेगा

 

 

उत्तरी पूर्वी दिल्ली के दंगों ने न केवल उन लोगों के जीवन को तबाह कर दिया है जिनके प्रियजनों और आजीविका को नष्ट कर दिया गया है, बल्कि पुलिस द्वारा एकतरफा ऑपरेशन में एक बड़ी संख्या में बेक़सूरों को  कैद किया गया है। इनमें से एक मुहम्मद काजिम भी है, जो जाफराबाद का निवासी है, जिस पर दिल्ली के दंगों में लूटपाट, चोरी, हत्या के प्रयास के संबंध में आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। मार्च में वेलकम पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसके बाद उसे  गिरफ्तार किया गया और करकरडूमा कोर्ट में पेश किया गया था। वह तब से मंडोली जेल में बंद है।

 

 

 

7 अगस्त को बड़ी बहन की शादी हो रही है, जिसके लिए उसके पास बहुत सारी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने  फैसला सुनाया कि आरोपी को पुलिस हिरासत में रहते हुए कुछ घंटों के लिए शादी में शामिल होने की अनुमति दी जाती है । जाहिर है यह फैसला किसी भी खुशी के अवसर के लिए उपयुक्त नहीं है, इसलिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी  निर्देश पर  एडवोकेट मुहम्मद तैयब खान और एडवोकेट शमीम अख्तर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं दायर कीं। अलग-अलग निर्णयों में, उच्च न्यायालय ने आरोपी को कुछ शर्तों के साथ सात दिनों की जमानत दी है ताकि वह अपनी बड़ी बहन की शादी में शामिल हो सके। इस फैसले  से मोहम्मद काज़िम की बहन के चेहरे पर ख़ुशी लोट आयी है.

 

 

 

 

इस संबंध में दिल्ली दंगा कानूनी मामलों के इंचार्ज और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव नियाज अहमद फारूकी  ने कहा कि इस तरह के अवसर बहुत भावुक होते हैं, इस लिए हमें भी काफी ख़ुशी है । उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद, दिल्ली दंगों में गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों के कई मामलों में  क़ानूनी पैरवी कर रही  है, उन्होंने ने कहा कि  जमीअत का संकल्प है कि निर्दोष पीड़ितों की रिहाई और पुनर्वास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

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