Hindi Urdu

NEWS FLASH

आखिर बाबरी मस्जिद को लेकर क्या सोचते हैं मुसलमान और मुस्लिम संगठन

पांच अगस्त को बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर के शिलन्यास समारोह का आयोजन किया गया। इस पूरे मामले में हिन्दुस्तान के मुसलमान ने अत्यंत धैर्य और सहनशीलता का प्रदर्शन किया और सर्वोच्च न्यायालय और देश की न्यायायिक व्यवस्था और क़ानून का सम्मान किया। यह देश की न्यायायिक व्यवस्था का दुर्भाग्य है कि अदालत ने दलीलें और साक्ष्य तो मस्जिद के हक़ में दिए, लेकिन फैसला मंदिर के हक़ में दे दिया। देश और दुनिया भर के इंसाफ पसंद अवाम और संस्थाओं ने न केवल इस नाइंसाफी को महसूस किया, बल्कि इसकी कड़ी आलोचना भी की। हम भी इस फैसले पर अपना मतभेद प्रकट करते हैं। यह फैसला देश और समुदाय के लिए कभी न भरने वाला ज़ख़्म है।

By: वतन समाचार डेस्क
  • बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर मुस्लिम रहनुमाओं का  संयुक्त ब्यान

नई दिल्ली, 05 अगस्त। पांच अगस्त को बाबरी मस्जिद की जगह मंदिर के शिलन्यास समारोह का आयोजन किया गया। इस पूरे मामले में हिन्दुस्तान के मुसलमान ने अत्यंत धैर्य और सहनशीलता का प्रदर्शन किया और सर्वोच्च न्यायालय और देश की न्यायायिक व्यवस्था और क़ानून का सम्मान किया। यह देश की न्यायायिक व्यवस्था का दुर्भाग्य है कि अदालत ने दलीलें और साक्ष्य तो मस्जिद के हक़ में दिए, लेकिन फैसला मंदिर के हक़ में दे दिया। देश और दुनिया भर के इंसाफ पसंद अवाम और संस्थाओं ने न केवल इस नाइंसाफी को महसूस किया, बल्कि इसकी कड़ी आलोचना भी की। हम भी इस फैसले पर अपना मतभेद प्रकट करते हैं। यह फैसला देश और समुदाय के लिए कभी न भरने वाला ज़ख़्म है।

 

 

दूसरी तरफ सितम यह है कि भारतीय संविधान का शपथ लेने वाले लोकतांत्रिक एवं धर्मनिर्पेक्ष देश भारत के प्रधानमंत्री ने भी मंदिर शिलान्यास के समारोह मे भाग लिया। सरकारी संसाधन और मीडिया का इस्तेमाल भी ज़ोरशोर से हो रहा है। हम समझते हैं कि यह तरीक़ा भारतीय संविधान और देश के धर्मनिर्पेक्ष ढांचे का खुला उल्लंघन है और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला है। ऐसे समय में हम समुदाय से सामूहिक अपील करते हैं कि उसने विगत में धैर्य, सहनषीलता और समझ का प्रदर्शन किया है उस पर जमे रहें। हमारा पक्ष जो पहले था वह भविष्य में भी रहेगा कि बाबरी मस्जिद, मस्जिद थी और रहेगी और हम मानवीय आत्मा पर दस्तक देते आये हैं और उस वक़्त देते रहेंगे जब तक देश के दामन से दाग़ न धुल जाएं। आशा है कि देश का सदाशयी वर्ग देश के धर्मनिर्पेक्ष ढांचे के उल्लंघन के इस तरीक़े को नहीं भुलाएगा।

 

 

अपीलकर्त्ता : मौलाना वली रहमानी, महासचिव आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जनाब सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी, अमीर, जमाअत इस्लामी हिन्द, मौलाना तौक़ीर रज़ा, अध्यक्ष मुस्लिम इत्तेहाद परिषद बरेली, जनाब नवेद हामिद, अध्यक्ष आल इंडिया मुस्लिम मजलिस मुशावरत, डॉक्टर मुफ्ती मुकर्रम, शाही इमाम मस्जिद फतहपुरी, दिल्ली, डॉक्टर ज़फरुल इस्लाम खान, निवर्तमान चेयरमैन दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग, डॉक्टर मोहम्मद मंज़ूर आलम, महासचिव आल इंडिया मिल्ली काउंसिल, डॉक्टर क़ासिम रसूल इलियास, अध्यक्ष वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया, मौलाना ख़लीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी, सज्जादा खानक़ाह नोमानिया नीरल, महाराष्ट्रा, मौलाना जलाल हैदर, अध्यक्ष आल इंडिया शिया काउंसिल, मुफ्ती अब्दुर्रज़्जाक़, अध्यक्ष जमीअत ओलमा हिन्द, दिल्ली, मौलाना मोहम्मद सलमान हुसैनी नदवी, प्रबंधक जामिया सैयद अहमद शहीद, मलीहाबाद लखनऊ, जनाब अब्दुस्सलाम, चेयरमैन पीएफआई, जनाब एम के फैज़, अध्यक्ष एसडीपीआई, डॉक्टर तस्लीम रहमानी, अध्यक्ष एमपीसीआई, मौलाना पीर सैयद तनवीर अहमद हाशमी, सज्जादा नशीन, खानक़ाह हाशमिया, बीजापुर कर्नाटक और मौलाना शब्बीर अहमद नदवी, प्रबंधक जामियतुस्सालिहात, बंगलौर।

यदि आपको यह रिपोर्ट पसंद आई हो तो आप इसे आगे शेयर करें। हमारी पत्रकारिता को आपके सहयोग की जरूरत है, ताकि हम बिना रुके बिना थके, बिना झुके संवैधानिक मूल्यों को आप तक पहुंचाते रहें।

Support Watan Samachar

100 300 500 2100 Donate now

You May Also Like

Notify me when new comments are added.

Poll

Should the visiting hours be shifted from the existing 10:00 am - 11:00 am to 3:00 pm - 4:00 pm on all working days?

SUBSCRIBE LATEST NEWS VIA EMAIL

Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.

Never miss a post

Enter your email address to subscribe and receive notifications of latest News by email.